मेरी ख्वाहिश

कुछ किस्मत हमारी भी ऐसी होती,
राहों में तू हमसफ़र होती।
मंजिलों से तब दिल न लगाते,
न रस्तों की हमको फिक्र होती।

काश ऐसी भी कोई इस समुन्दर में लहर होती,
जो संग मेरे हर पहर होती।
फिर करवटें न बदलते हम रात भर,
ख़ामोशी हमारी भी जुबां होती।

काश ऐसे तुम हमारे साथ होते,
जैसे तुम धुन और हम साज होते।
फिर ज़िन्दगी के गीत बेसुरे न होते,
और शायद हम भी इतने बुरे न होते।

काश तू मेरे आसमाँ में उड़ पाती,
तो मेरे मन की गहराइयों को छू पाती।
नज़दीक से तूने मुझे देखा नहीं,
वरना मेरी खामोशियों को भी सुन पाती।

– सहर

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