जो ग़ज़ल है

whatsapp-image-2017-02-07-at-17-49-37
जिस ग़ज़ल से हमें दिल्लगी है
उस के जिस्म में कहीं दिल नहीं हैं |
 
वो सहरा में लिपटा जल रहा है ख़ुद
उसके दरिया में कहीं जल नहीं है  |
 
उसके साथ ज़िंदगी है कुछ ऐसी
जर्रों की ख़ाक को इंसां कर दे |
 
वो ग़ैरत की बेड़ियाँ गर पहना दे
तो अजनबियों को भी अपना कर दे |
 
कहानी कुछ ऐसी लिखी है उन्होनें
जो सच को भी सपना कर दे |
 
जिनकी चमक से हमें रोशनी है
उन्हें आज कल रोशनी की कमी है |
 
जिस ग़ज़ल से हमें दिल्लगी है
उस के जिस्म में कहीं दिल नहीं है  |
 
 
                      – sahar
Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Powered by WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: