इरशाद – 4 

रोज़ सोचते हैं कुछ नया होगा ,

अब तू मिल भी जाए तो क्या होगा ?

जिस इंसान ने चाहा था तुम्हें 

मर चुका है वो, पता होगा।  

        – सहर

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