जो ग़ज़ल है

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जिस ग़ज़ल से हमें दिल्लगी है
उस के जिस्म में कहीं दिल नहीं हैं |
 
वो सहरा में लिपटा जल रहा है ख़ुद
उसके दरिया में कहीं जल नहीं है  |
 
उसके साथ ज़िंदगी है कुछ ऐसी
जर्रों की ख़ाक को इंसां कर दे |
 
वो ग़ैरत की बेड़ियाँ गर पहना दे
तो अजनबियों को भी अपना कर दे |
 
कहानी कुछ ऐसी लिखी है उन्होनें
जो सच को भी सपना कर दे |
 
जिनकी चमक से हमें रोशनी है
उन्हें आज कल रोशनी की कमी है |
 
जिस ग़ज़ल से हमें दिल्लगी है
उस के जिस्म में कहीं दिल नहीं है  |
 
 
                      – sahar
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इरशाद- 24 

“Wo shaksha jis se main chahta tha milna
Andheron mein gum baitha tha meri parchayee mein.”
– sahar

“वो शख्स जिस से मैं चाहता था मिलना,
अंघेरों में गुम बैठा था मेरी परछायी में।”

सहर

Irshaad- 23

“ऐसा क्या हुआ कि हम भूल गए 

अपने रंग , अपने शबाब 

धुलते गए हर बारिश के साथ 

हमारे शौक़ , हमारे रुबाब 

अपनी महफ़िलों से उठकर, आ गए ये कहाँ 

अब चढ़ती नहीं उस क़दर वो पुरानी शराब 

यूँ ही गुज़रा जा रहा है ये कारवाँ भी 

क़ैद होकर ही रह गया लफ़्ज़ों का सैलाब ”   

                                           – Mayank ‘Sahar’ Mishra

 

 

इरशाद-20

” न मैं हिन्दू हूँ और न तू है मुसलमान,
अब न जले तेरा घर, न झुलसे मेरा मकान,
आओ पढ़ें चैन-ओ-अमन की किताब,
मैं जला दूँगा अपनी गीता, तुम जला दो अपनी क़ुरान।”
– सहर

इरशाद 19. 

“अब जाकर कुछ मायने में पहली मोहब्बत धुँधली हो चुकी है,

तेरी बातें, तेरी यादें, और अब तेरी तस्वीर भी खो चुकी है। 

सहर नहीं होने दी हमने आपके इन्तज़ार में आज तक,

वो शाम जब हम बिछड़े थे वो अभी तक वहीं रुकी है। ”

          – सहर 

इरशाद- 17

‘नई सुब्ह पर नज़र है मगर आह ये भी डर है
ये सहर भी रफ़्ता रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे।’

                 – शकील बदायूनी। 

इरशाद-16

“कह चुका हूँ जो भी था दरमियाँ,पर ख़्वाहिशें अब भी होश खो रहीं हैं।” 

                              – सहर।

शायरी के पन्नों से 

रात का हिसाब लिखे कौन ?
कौन सुबह की ख़बर रखेगा ?
किसी इमारत का हिस्सा बन जायेंगे हम-तुम,
और महफ़ूज़ हमें ये शहर रखेगा। 

जुगनुओं के साथ जागे कौन ?
कौन ख़ुद को हमसफ़र रखेगा ?
घुल जायेंगे वक़्त में लम्हा बनकर,
और याद हमें ये पहर रखेगा।  

– सहर।

इरशाद -15

” देखते हैं कहाँ ले जाकर छोड़ेगा ये सफ़र ज़िन्दगी का,
हमारी कहानी तो मौत पर भी ख़त्म ना होगी | “
– सहर

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