इरशाद- 25

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” डूब जाए शमा चरागों को हँसाने की जुस्तुजू में ,
रात भर इसी सिलसिले में बस परवाने फ़िदा होते रहे। “

– सहर

इरशाद – 2

गर मुस्कुराए ना होते तुम हमारी ख़ुशी में,

तो हम भी आपके ग़म में ग़मज़दा ना होते। 

                                    –  सहर 

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